Waaris Shayari two Line
काश वो आ जाए और लड़ के ये कहे, Oye हम ही हम तेरी मोहब्बत के वारिस।
अकेले वारिस हो तुम, मेरी बेशुमार चाहतों के।
वारिस तो तुम ही रहोगे मेरी मोहब्बत के साहिब, क्या फर्क है इश्क पर दस्तखत तुम करो या मैं करूं।
मैं उदास लगती का अकेला वारिस, उदास शख्सियत पहचान मेरी।
उस के वारिस नज़र नहीं आए, शायद उस लाश के पते हैं बहुत।
मै खुश हूँ की उसकी नफ़रत की अकेली वारिस हूँ, वरना मोहब्बत तो उसे कई लोगो से है।
मेरी तमाम मोहब्बत का अकेला वारिस था वो कभी, आज वो मालिक बन बैठा है मेरी तमाम तन्हाईयो का।
मेरी गजल को तलाश थी किसी वारिस की, कल रात दिल ने तेरे नाम की सिफारिश की।
में अकेला वारिस हूँ तेरी तमाम, नफरतों का, ऐ मेरी जान, और तू सारे शहर में, प्यार बाटती फिर रही है।
नाज़ है मुझे, तेरी नफरतों की, अकेली वारिस हुं मैं, मुहब्बत तों तूझे , बहुत से लोगों से है।
मेरे आँसू नहीं हैं ला-वारिस, इक तबस्सुम से रिश्तेदारी है।
खत्म कर दी थी जिंदगी की, हर खुशियां तुम पर, कभी फुर्सत मिले तो सोचना मोहब्बत किसने की थी? तुम एकलौते वारिस हो मेरे सारे प्यार के।
Attitude एक नशा है पगली, और मेरे बाप की इस नशे की, फैक्ट्री का एकलौता वारिस मैं हूँ।
सोच कर ही परेशान हो जाती हू कि, मरने के बाद मेरी FB ID का वारिस कौन होगा ?
एक बात पुछनी थी, जब गुरूप के एडमिन बुड्ढे हो जाएगे तो, ग्रूप का वारिस कौन होगा ?